Monday, June 15, 2009

जीत कर भी हारता है इंसान

कई बार एक व्यक्ति को एक ही समय कई-कई मोर्चों पर लडाई लड़नी पडती है । अभिमन्यु की तरह चक्रव्यूह में घिरे व्यक्ति को अपनों से भी युद्घ करना पड़ता है । इस युद्घ में वह जीत भी सकता है और हार भी सकता है । किंतु इस जीतने और हारने दोनों में उसकी हार ही होती है ।