Friday, May 25, 2012

धड़कन बन के आजा



कहां है कहां है तू ये तो बता जा


सुरीली सी धुन में कोई गीत गा जा


अदाएं नशीली सी जब आएं मन में

ख़ाबों की यादें वो लगती खटकने

वो मोहिनी सी सूरत तू आ के दिखाजा

सुरीली सी धुन में कोई गीत गा जा


हैं सूनी ये राहें बिना तेरे दिलबर

मैं गिरता ही जाता हूँ बिन तेरे पल-पल

दे सदा हाय मुझको या खुद पास आजा

सुरीली सी धुन में कोई गीत गा जा


वो तेरी सदा थी तू मेरी मैं क्या हूँ

ये वो राज़ है जिसपे 'अर्पित' हुआ हूँ

दिल बनके आऊँ धड़कन बन के आजा

सुरीली सी धुन में कोई गीत गा जा

                                         -अर्पित अनाम

Wednesday, May 23, 2012

उनकी बला से, दूसरा चाहे मरे चाहे जिए


मजबूरियों का फायदा, उनसे उठाना सीखिए

आता नहीं हमको नजर शहतीर अपनी आंख का

क्यों दूसरों की आंख में तिनका सदा ढूंढा किये

उनके सिवा सब हैं बुरे, सारे जहाँ में देख लो

कहने का उनके हर यही मतलब निकलता किसलिए

क्या दमन होगा इससे ज्यादा, बोलने पर रोक है

फरियाद किससे और कैसे क्या किये रे क्या किये

तू सोचले 'अर्पित' मिलेगा ये सिला ही हर तरफ

बदनामियाँ ही आयेंगी हिस्से, भला जितना किये

Friday, May 4, 2012


एलेक्स को चाहिए कि अपने दिवगंत सुरक्षा कर्मी के घर जाकर सांत्वना दे और सहयोग करे .

Wednesday, May 2, 2012

in aankhon mein mere jaisi ye do moorten
hain kis-kis ki, zra ye to bta
ik to main hun teri ik aankh mein
dooji mein kaun 'arpit' hai mere siwa.