Monday, June 22, 2009

क्या घड़ा अभी भरा नहीं

अपराधी किस्म के लोग राज कर रहे हैं और शरीफ लोग घरों में दुबक कर बैठे हैं । ये शरीफ लोग किस बात का इंतजार कर रहे हैं । क्या घड़ा अभी भरा नहीं है ?

Monday, June 15, 2009

जीत कर भी हारता है इंसान

कई बार एक व्यक्ति को एक ही समय कई-कई मोर्चों पर लडाई लड़नी पडती है । अभिमन्यु की तरह चक्रव्यूह में घिरे व्यक्ति को अपनों से भी युद्घ करना पड़ता है । इस युद्घ में वह जीत भी सकता है और हार भी सकता है । किंतु इस जीतने और हारने दोनों में उसकी हार ही होती है ।

Saturday, June 13, 2009

निराशाजनक व्यवस्था

भारत की वर्तमान व्यवस्था बहुत ही निराशाजनक हो गई है सारी शक्ति ऊपर बैठे चंद हाथों में सिमट कर रह गई है नीचे बैठे लोग अक्सर ज्यादती का शिकार होते रहते हैं और कुछ नहीं कर पाकर मन मसोस कर रह जाते हैं आख़िर कब तक होगा ऐसा ?

Monday, June 8, 2009

सच बोलूं जो तब तो शामत आती है
चुप रहना भी नागवार गुज़रे है मुझे
-अर्पित अनाम

Tuesday, June 2, 2009

बन्दा उम्र बढ़ने के साथ-साथ व्यवहारिक हुआ जाता है
भावुकता पीछे छूटने लगती है
अनुभव की ठोकरें सिखा-सिखा कर परिपक्व बना देती हैं ।
-अर्पित अनाम